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दोस्तों मैं आप सबसे शेयर करने वाली हूं संतरी बेचने वाली बूढी मां की कहानी| बूढ़ी मां के पास एक नौजवान हमेशा आता हमेशा संतरा खरीदा और खरीदते संतरे में से किसी एक को पाख को चलते हुए कहता है अम्मा देखना यह तो कम मीठा है अम्मा हमेशा दूसरे पाख चखते कहता है नहीं बेटा यह तो बराबर मीठा है फिर भी यह लड़का बेरुखी के साथ खुले हुए संतरे को वही ठेले में छोड़कर चलता बंता |

इस नौजवान के साथ उसकी पत्नी भी हमेशा हुआ करती एक दिन पत्नी ने पूछा तुम हर बार अम्मा की ठेले पर पहुंचकर नौटंकी शुरू कर देते हो यह संतरी तो कम मीठा है संतरे तो मैंने भी चखा हैं बराबर होते हैं इस नौटंकी के पीछे राज क्या है तुम चाहते क्या हो |


लड़का ने अपने पत्नी को मीठी सी मुस्कान देकर कहा मुझे भी पता है सारे के सारे संतरे बहुत मीठे होते हैं लेकिन तुमने कभी अम्मा को देखा है अम्मा इतनी गरीब है जो बेचती है उसे कभी चखा भी नहीं होगा इसलिए तो खुला हुआ संतरा उनके ठेले पर छोड़ कर आती हूं मेरी ओर से अम्मा के लिए|


अम्मा के बाजू में जो सब्जी वाली थी उसने एक दिन कहा उनसे आपको पता है यह जो सरफिरा आपके ठेले पर आती है संतरे खरीदने के लिए इतनी चिक-चिक करता है आपसे कि आप नापतोल में ज्यादा संतरे दे देती हो। पर अम्मा ने कहा कभी मुझसे संतरी की मिठास के लिए चिक-चिक करता ही नहीं है वह चिक-चिक करता है मुझे संतरी खिलाने के लिए एक छोड़कर जाता है क्या मुझे पता नहीं उसके चिक-चिक में भी उसके प्यार की मिठास नजर आती है मुझे।

वह कहते हैं ना मेरे हिस्से से ज्यादा तूने मेरी थाली पर भरोसा है कितनी भी मुश्किलें दे ऊपर वाले तुझ पर भरोसा है छीन कर खाने वाले का कभी पेट नहीं भरता और बांट कर खाने वाले कभी भूखे नहीं मरते अगर कोई ऐसा जरूरतमंद दिखे उसे जरुर मदद करना इसे कहते हैं चेअर दिल से।

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