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क्या सच में इस्लाम में सूअर का मांस खाना मना है,इसीलिए मुसलमान नहीं खाते सूअर का मांस ?

दोस्तों सूअर का मांस पवित्र कुरान के अनुसार इस्लाम में खाना मना है और यह साफ साफ अक्षरों में लिखा हुआहै।लेकिन आप जानते हैं इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण छिपी हुई है। पहले मैं आपको बता दूं सुअर मैं स्वेटग्लैंड यानी पसीना पैदा करने वाली प्लांट नहीं होती।जिसकी वजह से सुअर को पसीना नहीं आता।इसीलिए आपने देखा होगा सूअर गर्मी से बचने के लिए कीचड़ में लेटते है।सुअर का शरीर पसीना नहीं पैदा होने के कारण शरीर विषाक्त हो जाती है इतने विषाक्त की स्ट्रीचनीने सलफेट जो जानवरों के शरीर पर जहर के समान होती है. उसका असर सुअर पर नहीं होता।

सूअर के मांस खाने पर आमतौर पर डाइजेस्ट करने के लिए 4 से 5 घंटा लगता है। दोस्तों इस मांस में मौजूद टॉक्सिन हमारे शरीर के लीवर को काफी है हानिकारक होते हैं इसे फिल्टर करने के लिए लीवर को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।सूअर के मांस में बफेलो के मांस के पर आवर काफी ज्यादा फैट होता है इसकी वजह से हमारे शरीर के अंदर चर्बी का परिमाण बद सकता है। जिसके लिए हार्ट अटैक और हाइपरटेंशन होने का खतरा बढ़ जाता है 201 अमेरिकी रिसर्च में पता चला है कि लगातार सूअर के मांस खाने से हार्ट डिजीज होने का परिमाण बढ़ जाता है।

आपको जानकर हैरानी होगी सूअर के मांस में बहुत बैक्टीरिया और पैथोजन पाई जाती है जैसे पिन वर्म,हुक वर्म और टेप वर्म सामिल है।टेप वर्म के अंडे खून के जरिए हमारे शरीर के कहीं भी जा सकते हैं इसके कारण यदि यह ब्रेन में चले जाते तो ब्रेन डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।


सिर्फ पवित्र कुरान में नहीं बल्कि बाइबिल में भी सूअर का मांस खाना मना है।ऐसा कहा जाता है और आपने सुना भी होगा जो हम खाते हैं उसका असर हम पर होता है।यह हम सब जानते हैं स्वर गंदा जानवर होते हैं स्वर आमतौर पर मल मूत्र जगह पर रहते हैं और आपको जानकर हैरानी होगी सुअर खुद का मल मूत्र भी खाता है।

यह सब बताने के बाद मैं यह कहूंगा कि हमारे धर्म ग्रंथ में जो बातें लिखी हुई है उसे सिर्फ अंधविश्वास ना समझे इन बातों के पीछे कोई ना कोई साइंटिफिक रीजन जरूर होते हैं इसलिए उन बातों का पालन हमें अवश्य करना चाहिए।

आप किसके बारे में क्या सोचते हैं नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताना और अच्छा लगा तो लाइक शेयर एंड हमारे अकाउंट को फॉलो जरूर करना जय हिंद भारत माता की जय।

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