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अमेरिका को परमाणु हमलें की धमकी देने वाला उत्तर कोरिया,भारत पर क्यों रहता है नरम


परमाणु शक्ति संपन्न और अमेरिका का धुर विरोधी उत्तर कोरिया जो हमेशा वहां के तानाशाह के द्वारा दी जा रही धमकीयों के कारण हमेशा चर्चा में बना हुआ है। आए दिन वहां के तानाशाह किम ज़ोंग उन के द्वारा अमेरिका पर परमाणु हमले की धमकी दी जाती रही है।अभी हाल में अपनी आक्रामक नीतियों में अपने घनिष्ठ मित्र चीन दखल तक को नही बक्सने वाला उत्तर कोरिया अब तक भारत के खिलाफ कभी भी आक्रामक रुख नही अपना सका है। इसकी मुख्य वजह उत्तर कोरिया से भारत के व्यापारिक और कूटनीतिक संबधों को बताया जाता है। गौरतलब है कि भारत 1953 में उत्तर कोरिया के जन्म से ही हर विपत्ति के समय में उत्तर कोरिया की मदद करता रहा है।

अंतराष्ट्रीय राजनीति की बात करें तो भारत और उत्तर कोरिया के बीच 1970 में राजनयिक संबध स्थापित हुए थे। तब से उत्तर कोरिया और भारत के रिश्ते परवान चढ़ते रहे। दोनो देशों के संबधों की मधुरता इस हद तक कायम रही कि दोनो देशों का व्यापार 2013 तक 60 मिलियन अमीरिकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत उत्तर कोरिया से जंहा ऑटोमोबाइल सिल्वर और अनेकों खनीज पदार्थो का आयात करता है वही दुसरी तरफ रिफाइंड ऑयल और खाद्द्य पदार्थों का निर्यात भी करता है।

भारत और उत्तर कोरिया के बीच सामरिक रिश्तों की बात करें तो उत्तर कोरिया के सेनीकों की ट्रेंनिग भारत द्वारा कराई जाती है। यहां यह बात दिगर है कि एक अच्छे दोस्त की तरह उत्तर कोरिया की मदद करने वाला भारत उसके गलत निर्णयों का कडा विरोध भी करता रहा है।

उदाहरण स्वरुप कोरियाई युद्ध में उत्तर कोरिया पर की जाने वाली सेन्य कार्यवाही का भारत ने खुलकर समर्थन किया था। लेकिन युद्ध में घायल सेनीकों के इलाज के लिए भारत से डॉक्टरों की विशेष टीम भेजी गयी थी और 2013 में कोरियाई क्षैत्र में आए भीषण आकाल के दौर में भी भारत ने उत्तर कोरिया की दिल खोलकर मदद की थी। इस अकाल के बुरे दौर में भारत ने उत्तर कोरिया को एक मिलियन टन दाल और भारी मात्रा में गैंहू भेजवाया था। वर्तमान समय में अमेरिका और चीन से रिस्तों में खटास के बावजूद.

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